Subjective / Written Questions (25)
1. ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के प्रथम चार अंकों में दुष्यन्त और शकुन्तला के संबंध के विकास का विवेचन कीजिए।
2. ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के प्रथम अंक की नाटकीय भूमिका स्पष्ट कीजिए।
3. कण्वाश्रम के वातावरण का ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ की कथा-विकास में क्या महत्त्व है?
4. दुष्यन्त के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का प्रथम चार अंकों के आधार पर परीक्षण कीजिए।
5. शकुन्तला के चरित्र में प्रेम, लज्जा और आत्मसम्मान के समन्वय को स्पष्ट कीजिए।
6. ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के प्रथम चार अंकों में प्रकृति-चित्रण की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
7. ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ में नन्दी और प्रस्तावना के नाटकीय प्रयोजन को स्पष्ट कीजिए।
8. नाट्यशास्त्रीय पारिभाषिक शब्द ‘नान्दी’ का स्वरूप एवं प्रयोजन समझाइए।
9. ‘सूत्रधार’ और ‘नटी’ की भूमिका नाटक की प्रस्तुति में किस प्रकार सहायक होती है?
10. ‘अंकावतार’ और ‘प्रवेशक’ में अंतर स्पष्ट करते हुए उनके नाटकीय उपयोग बताइए।
11. अनुप्रास और यमक अलंकार का लक्षण उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
12. श्लेष और उपमा अलंकार में अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
13. रूपक तथा उत्प्रेक्षा अलंकार की विशेषताएँ उदाहरण सहित समझाइए।
14. अतिशयोक्ति, सन्देह और भ्रान्तिमान अलंकारों का तुलनात्मक विवेचन कीजिए।
15. व्यतिरेक अलंकार का लक्षण बताते हुए उपमा से उसका अंतर स्पष्ट कीजिए।
16. अनुष्टुप् छन्द की संरचना और उसके प्रमुख लक्षण उदाहरण सहित लिखिए।
17. इन्द्रवज्रा और उपेन्द्रवज्रा छन्दों की रचना-विधि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
18. उपजाति छन्द का स्वरूप स्पष्ट कीजिए और इन्द्रवज्रा-उपेन्द्रवज्रा से उसका संबंध बताइए।
19. द्रुतविलम्बित छन्द के लक्षण एवं पहचान की विधि स्पष्ट कीजिए।
20. वंशस्थ छन्द की रचना तथा उसके लक्षणों का विवेचन कीजिए।
21. ‘किरातार्जुनीयम्’ के प्रथम 25 सर्ग/पद्यांश के आधार पर भारवि की अर्थगौरव-प्रधान शैली का विवेचन कीजिए।
22. ‘किरातार्जुनीयम्’ के प्रथम भाग में नीतिपरक चिंतन की अभिव्यक्ति स्पष्ट कीजिए।
23. ‘नीतिशतकम्’ के प्रथम 15 पद्यों में प्रतिपादित नीति-तत्त्वों का विवेचन कीजिए।
24. ‘नीतिशतकम्’ में विद्या, सज्जनता और सदाचार के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
25. लघुसिद्धान्तकौमुदी के संज्ञा-प्रकरण में ‘इत्संज्ञा’ की भूमिका स्पष्ट कीजिए।