Subjective / Written Questions (25)
1. बीसवीं शताब्दी के आरंभ से छायावाद तक हिन्दी काव्य के विकास की सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि स्पष्ट कीजिए।
2. छायावाद के उदय में राष्ट्रीय चेतना और व्यक्तिवाद की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
3. छायावादी काव्य में प्रकृति और आत्मानुभूति के संबंध का विश्लेषण कीजिए।
4. आधुनिक हिन्दी कविता में भाषा-परिवर्तन और काव्य-दृष्टि के संबंध को स्पष्ट कीजिए।
5. हिन्दी पत्रकारिता के विकास और राष्ट्रीय आंदोलन के संबंध का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए।
6. प्रयोजनमूलक हिन्दी की संकल्पना और उसके प्रशासनिक तथा व्यावसायिक उपयोग का मूल्यांकन कीजिए।
7. प्रवासी और विस्थापित समाज के साहित्य में स्मृति और पहचान के प्रश्न का विश्लेषण कीजिए।
8. भाषाविज्ञान के मूल सिद्धांतों के आधार पर भाषा और बोली के अंतर को स्पष्ट कीजिए।
9. हिन्दी भाषा के ऐतिहासिक विकास में अपभ्रंश, अवहट्ट और लोकभाषाओं की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
10. हिन्दी निबंध की साहित्यिक और साहित्येतर परंपराओं के अंतर्संबंध पर विचार कीजिए।
11. कबीर के काव्य में सामाजिक चेतना और निर्गुण आध्यात्मिकता के संबंध का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
12. प्रेमचंद के कथा-साहित्य की सामाजिक यथार्थ-दृष्टि का मूल्यांकन कीजिए।
13. निराला के काव्य में व्यक्तिवाद, विद्रोह और सामाजिक संवेदना का विश्लेषण कीजिए।
14. महादेवी वर्मा की काव्य-दृष्टि में रहस्यात्मकता और आत्मानुभूति के अंतर्संबंध पर विचार कीजिए।
15. फणीश्वरनाथ रेणु के आंचलिक लेखन की विशेषताओं का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए।
16. आधुनिक हिन्दी कविता में छायावाद से आगे की संभावित काव्य-प्रवृत्तियों का संकेत करते हुए मूल्यांकन कीजिए।
17. पत्रकारिता को जनसंचार के रूप में समझने की प्रमुख सैद्धांतिक समस्याओं पर विचार कीजिए।
18. प्रयोजनमूलक हिन्दी में पारिभाषिक शब्दावली की समस्याओं और संभावनाओं का विश्लेषण कीजिए।
19. डायस्पोरा साहित्य में ‘घर’ और ‘परायेपन’ की अवधारणाओं का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
20. भाषा-परिवर्तन को सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन से जोड़कर समझाइए।
21. निबंध में वैचारिकता और रचनात्मकता के संतुलन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
22. किसी विशिष्ट लेखक के अध्ययन में जीवन, कृतित्व और युग-संदर्भ को जोड़ने की पद्धति की समीक्षा कीजिए।
23. हिन्दी साहित्य में आधुनिकता के विकास को कविता, पत्रकारिता और गद्य के संयुक्त संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
24. भाषा-विज्ञान और साहित्य-अध्ययन के पारस्परिक संबंध की उपयोगिता पर आलोचनात्मक टिप्पणी कीजिए।
25. आधुनिक हिन्दी साहित्य के विकास में सामाजिक विविधता और नए विमर्शों के उभार का मूल्यांकन कीजिए।